हमें व्यायाम क्यों करना चाहिए ?

व्यायाम समस्त शरीर को उसकी लम्बाई-चौड़ाई के अनुपात में हृष्ट पुष्ट बनाने का एक आसान और व्यावहारिक उत्तम तरीका है। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की वृद्धि होती है और शरीर निरोग रहता है। शरीर के आंतरिक यन्त्र अपना कार्य सुचारु रूप से बिना किसी विकार और थकावट तथा तनाव के करने में सक्षम रहते हैं और दीर्घ समय तक शरीर का साथ निभाते हैं। व्यायाम द्वारा शरीर रोगहीन और स्वस्थ तो बनता ही है साथ ही सुन्दर और कांतिवान भी बनता है।

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बहुत से लोग व्यायाम के बिना भी स्वस्थ दिखते हैं। परन्तु वे केवल स्वस्थ दिखाई ही पड़ते हैं उनके शरीर का आंतरिक गठन स्वस्थ नहीं होता। अतः उन्हें कोई भी बीमारी शीघ्र घेर लेती है। फिर यह भी होता है। कि उनका कार्य कुछ इस ढंग का होता है कि उनके शरीर का उचित व्यायाम हो जाता है। कहने का तात्पर्य यही है कि व्यायाम के लिए चाहे आप अलग से समय निकालें या फिर आपका कार्य इस ढंग का हो कि आपका व्यायाम हो जाया करे।

व्यायाम की महत्ता मनुष्य को 40 वर्ष की अवस्था के बाद पता लगती है। जिन व्यक्तियों ने शरीर को व्यायाम से सुगठित निरोग नहीं बनाया वे इस उम्र में मोटापे के अलावा भिन्न-भिन्न बीमारियों का शिकार बनते हैं।
और जो लोग व्यायाम की महत्ता को समझते हुए युवावस्था में व्यायाम द्वारा शरीर को हृष्ट-पुष्ट, रोगविहीन बना लेते हैं उनके शरीर प्रौढ़ावस्था में आने वाली शारीरिक बीमारियों, तकलीफों को दूरकर स्वस्थ बने रहते हैं।

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अतः व्यायाम, योग, प्राणायाम, मालिश जैसी कसरतों के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए। आइए व्यायाम से होने वाले लाभ आपको बताएं |

व्यायाम के फायदे : vyayam karne ke fayde

(1)  कसरत रक्त संचार में तेजी लाती है। यह रक्त को पूरे शरीर में ले जाती है। मन्द रक्त संचार के कारण दर्द होता है और आराम नहीं मिलता। आम लोगों में साधारणतः घुटनों के नीचे रक्त का इतना कम संचार होता है, जो रक्त-पूर्ति का छठा हिस्सा है। इसलिए इनके पैर ठंडे हो जाते हैं और दर्द करते हैं। इसके सिवाय टांगें और घुटने सूज जाते हैं। इस क्षेत्र की कोशिकाओं के अवशेषों को दूर करने के लिए रक्त संचार काफी नहीं होता जिससे रिक्त इन अवशेषों को निष्कासित करने वाले अवयवों को सौंप दे, खासकर उन लोगों के लिए जो अधिक उम्र वाले हैं। इनक लिए टांगों की कसरत नितांत आवश्यक है। बहुधा देखा जाता है कि पैरों में इतना कम रक्त संचार होता है कि छोटी-सी चोट भी ठीक नहीं होती। इससे कोई रोग हो सकता है। आपकी शारीरिक अवस्था जो भी हो पर यह नितांत आवश्यक है कि कसरत आपके जीवन का एक भाग हो।

(2)  कसरत से ताकत बढ़ती है। और अंदरूनी अवयव व ग्रन्थियों के कार्य सुचारु रूप से होते हैं।

(3)  कसरत ऊतक को तोड़ती है। बढ़िया रक्त संचार व उचित भोजन द्वारा नयी, अधिक मजबूत व अधिक स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होता हैं।

(4)  कसरत से शरीर के महत्त्वपूर्ण अंगों का विकास और अन्य थकानेवाले तत्त्वों विषों को नष्ट करती है।

(5)  कसरत के सबसे सुपरिणामों में से एक है चयापचय। हम लोग अधिकतर अधिक कैलोरी लेते हैं। इन सबको यह इस्तेमाल कर लेती है।

(6)  शरीर से अवशेषों को उचित रीति में निकाल बाहर करने के लिए कसरत की आवश्यकता है। दुनिया में मशहूर डॉक्टरों का विश्वास है कि अनुचित निष्कासन क्रिया के कारण 10 प्रतिशत रोग लोगों को धर दबोचते हैं क्योंकि अपूर्ण निष्कासन क्रिया से शरीर में दूर किये जाने वाले विष शरीर के अंदर ही रह जाते हैं।

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(7)  सक्रियता जीवन है और अचलता मृत्यु है। कसरत शरीर के प्रत्येक अवयव ग्रंथि और कोशिका में स्वस्थ सक्रियता लाती है। यह पूरे शरीर और दिमाग को प्रफुल्लित रखती है।

(8) कसरत सब मांसपेशियों को नियंत्रित व संतुलित स्थिति में रखती है और उनका समन्वय करती है। यह गति में तेजी लाती है। समय, दूरी व स्थान का ठीक निर्णय करती है। यह पूरे शरीर को अपनी इच्छाशक्ति के अनुसार अधिक क्रियाशील बनाती है। खतरे के समय दिमाग को मालूम होने से पहले ही यह शरीर को उचित काम के लिए शिक्षा देती है। इस तरह घातक दुर्घटनाओं से लोग बहुधा बच जाते हैं।

(७)  कसरत भरोसा बढ़ाती है। क्योंकि अपने शारीरिक और मानसिक योग्यता के बारे में संतोषजनक ज्ञान हासिल करना ही सबसे बड़े भरोसे की बात है। इससे इच्छा शक्ति की वृद्धि होती है। यह शारीरिक मानसिक अहम् पर पूरा अधिकार जमाती है और व्यक्तिगत समर्थता और सब मानसिक शक्ति योग्यताओं को तेज करती है।

(10)  रोगों के विरुद्ध यह सबसे बढ़िया बीमा है। स्वस्थ रक्त के द्वारा यह प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है जो शरीर पर आक्रमण करने वाले कीटाणुओं को मार-भगाने के लिए सक्षम होती है।

(11)  अन्दरूनी मांसपेशियां जो सब अवयवों को अपनी-अपनी जगहों में रखती हैं जिससे कि अवयव अपने आवश्यक कर्तव्य अच्छी तरह निभायें, इन मांसपेशियों को कसरत सक्षम रखकर इस आवश्यक कार्य को सम्भव बनाती है।

(12)  कसरत मन को शांत रखने में मदद पहुंचाती है। जीवन के सामान्य रूप में यह आपको खुश और संतुष्ट रखती है। यह चिंता और खलबली पैदा करने वाले मानसिक विचार से शरीर को मुक्त रखती है।

(13)  यद्यपि हम जीने की अनियमितताओं की सिफारिश नहीं करते, फिर भी जब आप किसी पार्टी में जाते हैं तो उस समय आप स्वास्थ्य के नियम तोड़ देते हैं पर यदि आप कसरत करने के आदी हैं तो अधिक हानिकारक प्रभाव अनुभव नहीं करेंगें। जो आदमी कसरत करता है व खराब भोजन, शराब, अधिक धूम्रपान और अन्य आधिक्यों के प्रभावों पर काबू पा लेता है या उन्हें लताड़ देता है।

(14)  कसरत से बहुत सारे दर्दो पर विजय मिलती है। अधिक खाने द्वारा जो रोग होते हैं उन पर भी यह कब्जा कर लेती है। ऑर्थराइटिस, जोड़ों का कड़ापन आदि रोगों को कसरत और उचित रीति से जीवनयापन ठीक कर देती है। इस तरह के बहुत से और उदाहरण दर्शाये जा सकते है।

(15)  कसरत के कारण बढ़िया रक्त संचार, बढ़िया निष्कासन और बढ़िया श्वसन प्रणाली होती है, जिसके द्वारा बहुत सारे जीवन लेने वाले दर्दनाक रोगों और चोटों से आप बचे रह सकते हैं।

उपर्युक्त 15 कारणों के अलावा कसरत करने के दो अन्य अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कारण हैं। कसरत करने से आप बढ़िया महसूस करेंगे और बढिया दिखेंगे। आपके बढ़िया आकार को देखकर आपके परिवार के सदस्य और आपके दोस्त आपकी प्रशंसा करेंगे। जब आप कसरत कर स्वस्थ महसूस करते हैं तो आपको दौड़ने या कूदने की उमंग आएगी। बदन में बिजली-सी भरी रहेगी। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर के दो अवयव, त्वचा और फेफड़े जब स्वस्थ रहते हैं तो वे अन्य अवयवों की अपेक्षा तीन या चार गुना अधिक अवशेष शरीर से बाहर फेंकते हैं। केवल फेफड़ों पर विचार करें।

जब कसरत द्वारा ये सक्रिय रखे जाते हैं तो यह एक दिन में करीब एक किलोग्राम वजन का अवशेष बाहर फेंकते हैं। लेकिन दुःख की बात है। यह कि त्वचा और फेफड़ों को प्रायः शिथिल या आलसी रखा जाता है। | त्वचा और फेफड़े सक्रिय कसरत पाकर ही अपने आवश्यक कार्य भली-भांति पूरे कर सकते हैं। अतः कसरत द्वारा त्वचा और फेफड़ों को स्वस्थ रखते हुए अपने पूरे शरीर की तंदुरुस्ती बनाये रखिये। कसरत करना जीवन बढ़ाना है, स्वस्थ रहना और आनन्द पाना है।