सरसों का सामान्य परिचय एवं स्वरूप :

तिलहन की फसल के रूप में बड़े पैमाने पर सरसों की खेती की जाती है। इसका पौधा 60 से 150 सेंमी. तक ऊँचा तथा शाखा-प्रशाखाओं से घना बन जाता है। पत्ते दंतुर, चौड़ाई में कम, लंबाई में अधिक, मुलायम, मोटे पत्रवृंत पर लगते हैं। फूल पीले, गुच्छे में लगते हैं। फलियाँ पतली, लंबी, बीज भाग की रचना स्पष्ट दिखाई देती है। बीज काले तथा ललाई लिए काले या पीले, चिकने, अंदर का भाग पीला तथा सरसों की गंधवाला होता है। पौधे की एक जड़ मूसला होती है। अन्य जड़े ऊपरी सतह की मिट्टी को मजबूती से पकड़े रहती हैं। समस्त भारत में, मैदानी भागों में विशेष रूप से इसकी खेती की जाती है। सरसों तिलहन का मुख्य स्रोत है।

सरसों का विविध भाषाओं में नाम :

अंग्रेजी-Yellow sarson | अरबी–हुर्फ | तेलुगू–आबालु, | बँगला –सरीसा | फारसी–सरशफ | मराठी-शिरशी | संस्कृत–सर्षप | हिंदी-सरसों, लाहा।

सरसों के औषधीय गुण :

✦सरसों के मुलायम ताजा पत्तों का साग चरपरा, मूत्र तथा मल को निकालनेवाला, भारी, पाक में खट्टा, जलन पैदा करनेवाला, गरम, रूखा तथा तेज होता है।
✦सरसों के बीज बड़े गुणकारी हैं। ये पाचक, चरपरे, स्निग्ध तथा स्वाद-उत्तेजक होते हैं।
✦सरसों का तेल ठंडा, गरम, खुश्की मिटानेवाला, दर्दनाशक, विषाणुनाशक तथा कृमियों को नष्ट करनेवाला है।

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उपयोग :

✦सरसों का उपयोग उसकी प्रारंभिक अवस्था से ही शुरू हो जाता है। सरसों के कोमल पत्तों की सब्जी तथा भजिया बनाते हैं। इसमें कोमल कलियों एवं पत्तों की भजिया विशेष रूप से बनाई जाती है। पंजाब में सरसों का साग और मक्के की रोटी जगत्-प्रसिद्ध है।
✦सरसों के दाने पीसकर अचार आदि में डाले जाते हैं। बीजों से खाद्य तेल निकाला जाता है। सरसों का तेल पूड़ी-पक्वान्न तलने का उत्तम माध्यम है।
✦ इसके तेल में अचारों को लंबे समय तक परिरक्षित किया जाता है।
✦सरसों का तेल सब्जी आदि छौंकने के साथ-साथ प्रकाश के लिए दीपकों में जलाया जाता है।
✦ सरसों के तेल का दीपक जलाकर उससे प्राप्त कालिख से काजल बनाया जाता है।
✦तेल निकालने के बाद बची खली पशुओं का पौष्टिक आहार है।
✦ सरसों की लकड़ी गाँव-देहात में ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाती है।
✦ सरसों का हरा पौधा पशुओं का मनपसंद चारा है।

सरसों के फायदे व औषधीय गुण :

आयुर्वेदिक चिकित्सा में सरसों के समस्त भाग एवं इसके तेल का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है, वे सरसों के मुलायम ताजा पत्तों का साग या बथुआ, पालक आदि के साथ मिलाकर बनाया साग खाएँ। जब मौसम न हो तो सरसों के पत्तों को बारीक काटकर व सुखाकर सुरक्षित रख लें। बिना मौसम में इसका स्वाद और भी उत्तम हो जाता है।

1-शारीरिक स्फूर्ति :
सरसों के तेल की मालिश नियमित करने से शरीर में शक्ति का संचार होता है। शरीर में गरमी बढ़ती है तथा स्निग्धता आती है। यह मालिश थकावट को दूर भगा देती है तथा मानसिक शांति लाती है।

2-दंत-विकार :
दाँत तथा मसूड़ों में अकसर बादी की चीज खा लेने से दर्द, सुरसुराहट या ठंडा-गरम पानी लगने लगता है। इसके लिए चुटकी भर सादा नमक में सरसों के तेल की तीनचार बूंदें डालकर हलके हाथ से दाँतों तथा मसूड़ों की मालिश करें। मुँह नीचे की ओर करके लार बाहर गिरने दें। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इस क्रिया से दंत-विकारों में बड़ा आराम मिलता है।
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3-फोड़ा-फुंसी :
बरसात के मौसम में फोड़े-फुसियों का प्रकोप बढ़ जाता है। पीली-पीली और छोटी-छोटी फंसियों से पीप रिसकर नई फुसियाँ पैदा कर देता है। ऐसी अवस्था में फुसियों को हल्के गरम पानी में या पोटाश डालकर, यह उपलब्ध न हो तो लहसुन के काढ़े से धोकर साफ कर लें। सरसों के तेल में कपूर अथवा कोई भी पाउडर मिलाकर मरहम जैसा बना लें। अब इस मरहम को प्रतिदिन दो-तीन बार लगाया करें। फोड़े-फुसियों से छुटकारा मिल जाएगा।
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4-कानदर्द :
दिन या रात, किसी भी समय कान में दर्द होने लगता है तो दर्द का कारण कान में फुसी का होना भी हो सकता है, तब इसके लिए लहसुन की तीन-चार कलियाँ सरसों के तेल में खौलाकर उस तेल को ठंडा करके दो-दो बूंद कान में डालें। स्वस्थ कान में भी इसे डाल सकते है |
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5-होंठ फटना :
सुबह स्नान करने के बाद तथा रात्रि में शयन करने से पूर्व सरसों के तेल की एक-दो बूंद नाक में डालें, होंठों तथा नाभि में भी लगाया करें। इससे होंठ नहीं फटेंगे तथा होंठों पर लावण्य की प्राकृतिक लाली छाई रहेगी।
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6-सुंदर-काले बाल :
बालों को काले, स्वस्थ, चमकीले तथा सुंदर बनाना चाहते हैं तो रोजाना स्नान के बाद सरसों के तेल से सिर की हलके हाथों से मालिश किया करें। किसी भी तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग किए बिना बाल काले तथा मजबूत रहेंगे।
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7-खाँसी-खुश्की :
खाँसी की शिकायत बार-बार हो जाती है तो सरसों के दाने बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटा करें। इससे निश्चय ही खाँसी में आराम मिलेगा।
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8-जोड़ों के दर्द :
जोड़ों के दर्द में सरसों का तेल गरम करके मालिश किया करें। सर्दियों में यह मालिश धूप में बैठकर करें। यदि दर्द गठिया का है तो सरसों के तेल में कपूर मिलाकर इसकी मालिश करनी चाहिए।

9-विष प्रभाव :
किसी भी प्रकार का विषपान कर लेने पर गरम पानी में सरसों के दानों का बारीक चूर्ण मिलाकर पिला दें। इससे वमन के द्वारा विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाएगा और विष का प्रभाव क्षीण हो जाएगा।

10-त्वचा रोग :
त्वचा संबंधी विकार तथा रंग निखारने के लिए सरसों के तेल में पिसी हलदी, कपूर, बेसन तथा दही मिलाकर उबटन करें। बाद में गुनगुने पानी में नीबू के रस की दो-चार बूंदें डालकर त्वचा साफ करें। इससे त्वचा निखर जाएगी और मुलायम भी बनेगी। इसके अलावा सरसों के दानों को दूध में उबाल लें, फिर पीसकर उसका उबटन लगाएँ। इससे भी रंग निखर जाता है।

11-कीले-मुँहासे :
कील-मुँहासे के दाग चेहरे को बदसूरत बना देते हैं। इसके लिए सरसों के दाने, वच, लोध्र तथा सेंधा नमक मिलाकर पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इस लेप को चेहरे पर लगाएँ और कुछ देर बाद रगड़कर साफ कर लें। फिर हल्के गरम पानी में नीबू के रस की तीन-चार बूंदें डालकर चेहरा साफ करें। इसके नियमित प्रयोग से चेहरा साफ होकर निखर जाएगा।

12-तिल्ली बढ़ना :
तिल्ली की शिकायत में या तिल्ली के बढ़ जाने पर सरसों के तेल को कुनकुना करके पेट पर मालिश किया करें। इससे तिल्ली का बढ़ना रुक जाएगा।

13-दमे का दौरा:
दमे का प्रकोप तेज हो रहा हो तो सरसों के दानों को पीसकर, उसकी चाय बनाकर रोगी को पिला दें। इससे दमे का दौरा शांत हो जाएगा।

14-कब्ज़नाशक :
पेट में कब्ज रहता है या कब्ज पुराना पड़ गया है तो पेट की सफाई के लिए ताजा मुलायम सरसों, बथुआ तथा कुछ भाग मेथी मिलाकर साग बनाएँ। पकने पर अदरक तथा कालीमिर्च कुचलकर डालें, बाद में इसमें हींग अथवा जीरे का तड़का लगाकर दो-तीन दिन भोजन में शामिल करें तो पुरानी-से-पुरानी कब्ज भी दूर हो जाती है।

15-नेत्र-ज्योति :
सरसों के मौसम में प्रतिदिन इसका (साग, भुजिया, रोटी, सलाद) किसी-नकिसी रूप में सेवन करें तो आँखों की ज्योति बढ़ती है।

16-सिरदर्द :
मलेरिया या गरमी के कारण आए बुखार में तीव्र सिरदर्द हो रहा हो और बेचैनी भी हो तो सरसों के तेल में पानी मिलाकर सिर की मालिश करनी चाहिए। इससे सिर की खुश्की मिटकर दर्द में आराम मिलता है।

नोट :- ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।