मालिश के गुण व कार्य :

यदि मालिश को माँसपेशियों की ‘कसरत’ कहा जाए तो गलत न होगा। माँसपेशियों के लिए मालिश उतनी ही आवश्यक है जितनी रक्त को सूक्ष्मातिसूक्ष्म नाड़ियों में प्रवाहित होने के लिए उसमें जल का यथेष्ठ मिश्रण । मालिश का मन्तव्य होता है-माँसपेशियों में गति उत्पन्न करना । जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारा शरीर अनगिनत माँसपेशियों से मिलकर बना है। माँसपेशियों के फूलने पर उनमें गति का अनुभव होता है और नर्म तथा कोमल पड़ जाने से उनमें एक प्रकार सख्ती और शिथिलता आ जाती है। माँसपेशियाँ हरकत चालू रखती हैं, जिनसे उनको जीवनीशक्ति प्राप्त होती है। मालिश से माँसपेशियों को अपना कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए क्षमता और शक्ति प्राप्त होती है।

मानव-शरीर में माँसपेशियों और रक्त के प्रवाह का चोली-दामन का साथ है । वैज्ञानिक शब्दों में हम कहें तो रक्तधारा का रक्तवाहिनी नाड़ियों में बिना रुकावट के प्रवाहित होते रहना, शारीरिक माँसपेशियों की स्वस्थावस्था पर ही निर्भर करता है। ये ही दो कार्य-माँसपेशियों की गतिशीलता और नाड़ियों में उन्मुक्त रक्तप्रवाह-हमारे स्वास्थ्य तथा सुखमय जीवन की आधारशिलाएँ हैं । प्रथम दशा में शरीर का अंग-प्रत्यंग लचीला होकर शक्तिशाली बन जाता है और दूसरी दशा में-शरीर के अन्दर स्वाभाविक रूप से रक्त प्रवाह होते रहने से शरीर की पाचनक्रिया को सहायता मिलती है।

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मालिश से रक्तप्रवाह में रगड़ एवं गर्मी उत्पन्न होकर तीव्रता उत्पन्न हो जाती है, जो रोगों की निवृत्ति में सहायक सिद्ध होती है । मर्दन क्रिया से रक्त में मिले विषाक्त द्रव्य बँटकर अलग हो जाते हैं और पसीना व पेशाब आदि के रास्तों से होकर शरीर के बाहर निकल जाते हैं जिससे रक्त शुद्ध होकर शरीर, स्फूर्ति तथा ओज से परिपूर्ण हो जाता है। थकावट को दूर करने के लिए मालिश से बढ़कर शायद ही कोई अन्य उत्तम प्रयोग स्वास्थ्य मर्मज्ञों को अब तक ज्ञात हुआ हो।

मालिश का प्रभाव माँसपेशियों, स्नायुओं, रक्त की नालियों तथा त्वचा पर समान रूप से पड़ता है जिसकी वजह से रक्त के संचार में अतिशीघ्र नवीन शक्ति व स्फूर्ति उत्पन्न हो जाती है। मालिश से माँसपेशियाँ कम थकावट के साथ कार्य करने योग्य हो जाती हैं । जोड़ लचीले और सौत्रिक बन्धन ढीले हो जाते हैं। रक्त का एक स्थान पर जमाव व चिपकाव दूर हो जाता है और रुकावट डालने वाला दूषित द्रव्य रक्त संचालनयुक्त होकर बह जाता है। इसके अतिरिक्त शरीर के स्नायु-जाल पर मालिश का आश्चर्यजनक प्रभाव पड़ता है और विविध प्रकार की पीड़ाएँ बिल्कुल ही गायब हो जाती हैं।

मालिश द्वारा रोगों का उपचार : malish se rogo ka upchar

आजकल मालिश द्वारा लगभग सभी रोगों का सफल इलाज हो रहा है। यूरोप तथा अमेरिका में तो इस विषय के विशेषज्ञ मालिश के अस्पताल खोलकर अपना यशवर्धन कर रहे हैं। इन अस्पतालों में हजारों की संख्या में रोगियों की चिकित्सा मात्र मालिश द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक ढंगों का प्रयोग करके सफलतापूर्वक की जाती है। हमारे यहाँ भी ‘आयुर्वेद में मालिश पर काफी कुछ लिखा गया है। आयुर्वेद में एक स्थान पर आया है। कि-‘विष खाए हुए रोगियों के शरीर से विष निकालने के लिए मालिश अचूक चिकित्सा है।’ इसी प्रकार का प्रयोग भिन्न-भिन्न तरीकों से शरीर के विभिन्न अंगों पर किया जाता है जिसका प्रभाव रक्त तथा माँसपेशियों पर आश्चर्यजनक ढंग से पड़कर निम्न रोगों से छुटकारा दिला देता है।

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गठिया रोग-
इस रोग में मालिश से बहुत ही लाभ होता है। मालिश करते समय शुद्ध सरसों का अथवा तिल का तेल प्रयोग में लाना चाहिए और धूप में बैठकर मालिश करनी चाहिए। मालिश में उतनी ही ताकत लगानी चाहिए जितनी कि रोगी आसानी से सह सके। मालिश करते समय रीढ़ और जोड़ों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इन जगहों पर दोनों ओर से हल्की-हल्की मालिश करते हुए हड्डी और जोड़ की तरफ हाथ ले जाना चाहिए तथा मालिश काफी देर तक होनी चाहिए जिससे रक्त में यथेष्ठ मात्रा में गर्मी और उसकी गति में तीव्रता उत्पन्न हो जाए। मालिश प्रतिदिन नियमित रूप से कुछ दिनों तक लगातार की जानी चाहिए। इस बीच मालिश के साथ-ही-साथ प्राकृतिक चिकित्सा सम्बन्धी अन्य आवश्यक नियमों का भी कठोरता के साथ पालन किया जाना आवश्यक है।

नाभि टलना (नाल उखड़ना)-
यह रोग प्रायः अपनी शक्ति से अधिक काम करने पर अथवा कोई भारी वजन की वस्तु उठा लेने से हो जाता है। इस रोग के रोगी को कभी-कभी दस्त भी आने लगते हैं। इसकी चिकित्सा भी साधारण पेट की मालिश करके गुणी लोग आसानी से कर लेते हैं।

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हड्डियों के जोड़ों का उखड़ना-
पेड़ से गिर जाने के कारण अथवा अन्य किसी प्रकार से जब किसी व्यक्ति के हड्डियों के जोड़ उखड़ जाते हैं तो हड्डी बैठाने वाले अनुभवी व्यक्ति मात्र हल्की-सी मालिश द्वारा हड्डियों को बैठा देते हैं।

गर्भाशय का स्थान-च्युत हो जाना-
इस रोग में कोई-कोई अनुभवी दाइयाँ (नर्स) मालिश का प्रयोग करके आश्चर्यजनक रूप से रोगिणी को रोगमुक्त कर देती हैं।

इसके अतिरिक्त-उचित मालिश द्वारा आँत उतरने का रोग (हार्नियाँ), सिर का दर्द, मोच और शरीर के किसी अंग की पीड़ा सरलतापूर्वक दूर की जा सकती है। माँसपेशियों में अधिक रक्त पहुँचाने का जो गुण और शक्ति मालिश में होती है उसके कारण बच्चों की लकवे की बीमारी में भी मालिश से बहुत लाभ होता है। मालिश से सिकुड़े हुए घाव फैलाए जा सकते हैं और अकड़े हुए जोड़ों में गति उत्पन्न की जा सकती है तथा उन जोड़ों में जिनकी माँसपेशियों को लकवा मार गया हो अथवा दुर्बलता ने घेर रखा हो, फिर से उनकी चेष्टाओं को मालिश द्वारा सुगमतापूर्वक जाग्रत किया जा सकता है।

नोट-हमने ऊपर मालिश द्वारा कुछ रोगों की चिकित्सा दृष्टान्त रूप में लिखी है। इसी प्रकार अन्य कितने ही रोगों की चिकित्सा मालिश विधि के अनुभवी लोग मालिश द्वारा पूर्णरूपेण सफलतापूर्वक करते हैं।
मालिश के करने में अथवा मालिश कराने में इस बात का ध्यान अवश्य ही रखना चाहिए कि रोग दूर करने के लिए जब किसी अंग की मालिश करानी हो तो किसी चतुर मालिश करने वाली दाई अथवा इस विषय के किसी अन्य विशेषज्ञ से ही मालिश करानी चाहिए, अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि होनी भी संभव है।