डायबिटीज (शुगर,मधुमेह) में खान-पान और सावधानियां :

इन्सुलिन हार्मोन के स्रावण में कमी से डायबिटीज रोग होता है। डायबिटीज आनुवांशिक या उम्र बढ़ने पर, मोटापे या तनाव के कारण हो सकता है। डायबिटीज ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति को काफी परहेज से रहना होता है। बदपरहेजी करने के दूरगामी परिणाम बुरे होते हैं। मधुमेह के रोगी का भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता बल्कि उसके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को संतुलित रखने में भी सहायक होता है।

आमतौर पर मधुमेह रोगी ब्लड शुगर की नार्मल रिपोर्ट आते ही लापरवाह हो जाता है। मधुमेह के मरीज के मुँह में गया हर कौर उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसलिए जो भी खाएं सोच समझकर खाएं।

मधुमेह के रोगी को आँखों व किडनी के रोग, सुन्नपन आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए सदैव यही प्रयत्न करना चाहिए कि ब्लड ग्लूकोज लेवल फास्टिंग 70-110 मिलीग्राम/ डीएल व खाना खाने के 2 घंटे बाद का 100-140 मिलीग्राम डीएल बना रहे। इसके लिए इन्हें खान-पान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। 45 मिनट से 1 घंटा तीव्र गति से पैदल चलना या अन्य कोई भी व्यायाम करना चाहिए। सही समय पर दवाई या इंसुलिन लेना चाहिए। डायबिटिक व्यक्ति को आवश्यक खुराक से 5 प्रतिशत कम खाद्य लेना ही उचित है।

आहार में पोषक तत्वों की मात्रा :

सामान्य डायबिटिक व्यक्ति को अपने आहार में कुल कैलोरी का 40 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों से, 40 प्रतिशत फेट (वसा) युक्त पदार्थों से व 20 प्रतिशत प्रोटीन युक्त पदार्थों से लेना चाहिए। एक वयस्क अधिक वजनी डायबिटिक व्यक्ति को 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट से, 20 प्रतिशत फेट से व 20 प्रतिशत प्रोटीन से कैलोरी लेना चाहिए। डायबिटिक व्यक्ति को प्रोटीन अच्छी मात्रा में व उच्च गुणवत्ता वाला लेना चाहिए जैसे दूध, दही, पनीर सोयाबीन आदि का सेवन करना चाहिए।
इन्सुलिन ले रहे डायबिटिक व्यक्ति को खाना सही समय पर लेना चाहिए। ऐसा न करने पर हायपोग्लाइसीमिया हो सकता है।

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हाइपोग्लिसेमिया के लक्षण :

(1) कमजोरी लगना
(2)अत्यधिक भूख लगना
(3) पसीना आना
(4) नजर से धुंधला या डबल दिखना
(5) हृदयगति तेज होना
(6) झटके आना एवं गंभीर स्थिति होने पर कोमा भी हो सकता है।

डायबिटीज (शुगर,मधुमेह) में क्या खाना चाहिए ? :

डायबिटिक व्यक्ति को हमेशा अपने साथ कोई मीठी चीज जैसे ग्लूकोज, शक्कर, चॉकलेट, मीठे बिस्किट रखना चाहिए।

1- मेथीदाना (दरदरा पिसा हुआ) 1/2 – 1 चम्मच खाना खाने के 15-20 मिनट पहले लेने से शुगर कंट्रोल में रहती है व फायदा होता है।

2- रोटी के आटे को बिना चोकर निकाले प्रयोग में लाएं इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसमें सोयाबीन मिला सकते हैं।

3- घी व तेल का सेवन दिनभर में 20 ग्राम (4 चम्मच) से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अतः सभी सब्जियों को कम से कम तेल का प्रयोग करके नॉनस्टिक कुकवेयर में पकाना चाहिए।

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4- हरी पत्तेदार सब्जियाँ खाना चाहिए। अपनी कैलोरीज का निर्धारण कुशल डायटीशियन से कराकर उसके अनुसार चलें तो अवश्य ही लाभ होगा।

5- एक सामान्य डायबिटिक व्यक्ति को चाहिए कि वह एक समय पर बहुत सारा न खाए बल्कि प्रति दो-ढाई घंटे पर कुछ खाते रहें।

6- तले हुए पदार्थ, मिठाइयाँ, बेकरी के पदार्थों से परहेज करें। दूध सदैव डबल टोन्ड ( स्किम्ड मिल्क) का प्रयोग करें।

7- कम कैलोरीयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें जैसे भुना चना छिलके वाला, परमल, अंकुरित अनाज, सूप, सलाद आदि का ज्यादा सेवन करें।

8- दही स्किम्ड मिल्क से बनाया हुआ ले सकते हैं। मधुमेह में छाछ का सेवन श्रेयस्कर होता है।