कारण :

गर्मी (summer) में हमे प्यास (thirsty) बहुत लगती है क्योंकि शरीर (Body) में से पानी (water) का एक बड़ा हिस्सा पसीने के रूप में बाहर निकलता है जिसकी वजह से हमारे शरीर में पानी की कमी (Dehydration) सर्दियों के मुकाबले अधिक होती है और ऐसे में बार बार पानी पीने से भी प्यास (thirsty) नहीं बुझती है ऐसे में कुछ घरेलू टिप्स (home tips) आपके लिए काफी काम के हो सकते है

पहला प्रयोगः 1 से 5 तोला गुड़ का आवश्यकतानुसार पानी बनाकर 4-5 बार कपड़छान करके पीने से प्यास (गले का सूखना) मिटती है।

दूसरा प्रयोगः गर्मी में नीम के पत्तों का एक तोला (12 ग्राम) रस पीने से भी लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः सूखे आँवले के 50 ग्राम चूर्ण को मिट्टी के बर्तन में चार घण्टे भीगोकर पीने से गर्मी की ऋतु में बार-बार लगने वाली प्यास में राहत होती है।

उसके अलावा अन्य लाभदायक उपचार-

1* दो चम्मच दही लें और उसमे छोटी इलायची पीस कर मिला लें और इसे चाटने से भी आपकी प्यास (thirsty) कम हो जाती है |
शहद को पानी में मिलकर कुल्ले करने से भी प्यास (thirsty) में कमी होती है |

2* लौंग को मुंह में रखकर आप अपनी प्यास (thirsty) की समस्या से निजात पा सकते है |

3* भुने हुए जौ के आटे को पानी में मिलाकर उसमे घी मिलाकर पीने से भी प्यास (thirsty) में कमी आती है साथ ही आपके शरीर की जलन भी ठीक हो जाती है |

4* पुदीने के पत्तो को पीसकर ठन्डे पानी में मिलाकर पीने से भी आपकी प्यास (thirsty) सही हो जाती है और साथ में शरीर को भी ठंडक मिलती है |

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. धनिया : हरा धनिया और सूखा आंवला को मिलाकर चटनी बनाकर प्रतिदिन खाने से गले का सूखना व प्यास का अधिक लगना दूर हो जाता है।

2. खुरफे : खुरफे के बीजों को 10 ग्राम पानी के साथ पीस व छानकर खांड मिलाकर पिलाने से प्यास की तीव्रता कम हो जाती है।

3. शहद :

20 ग्राम “अच्युताय हरिओम शहद” को मुंह में 10 मिनट तक रखें फिर कुल्ला कर दें। इससे अधिक तेज प्यास भी शांत हो जाती है।

प्राप्ति-स्थान : संत श्री आशारामजी आश्रमों और श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र 

> शहद को मुंह में भरकर कुछ देर तक रखकर कुल्ला करने से तेज प्यास शांत हो जाती है।

> पानी में शहद या चीनी मिलाकर पीने से गले की जलन व प्यास मिट जाती है।

4. इमली :

> इमली के बीज को छीलकर चूसने से बार-बार लगने बाले प्यास बुझ जाती है।

> इमली के पानी से कुल्ला करने से गले की खुश्की व प्यास शांत हो जाती है।
5. इलायची : 12 छोटी इलायची के छिलके को 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी रहने पर इसके चार हिस्से करके हर 2-2 घण्टे पर पिलाने से प्यास अधिक नहीं लगेगी। किसी भी बीमारी में यदि प्यास अधिक हो तो ठीक हो जाती है।

6. बबूल : प्यास और जलन में इसकी छाल के काढ़े में मिश्री मिलाकर पिलाना चाहिए। इससे लाभ होता है।

7. बरगद : बरगद की कोंपलों के साथ दूब, घास, लोध्र, अनार की फली और मुलेठी बराबर में लेकर, एक साथ पीसकर शहद में मिलाकर चावलों के धोवन के साथ सेवन करने से उल्टी और प्यास में शांति मिलती है।

8. बारतग : प्यास ज्यादा लगने पर बारतग के 5 ग्राम बीज पानी के साथ सेवन करने से प्यास दूर होती है।

9. कागजी नींबू : कागजी नींबू के रस में 2 चुटकी भर चीनी डालकर पिलाने से प्यास के अधिक लगाने में लाभ होता है।

10. केला :

> पके केले खाने से प्यास रोग मिटता है।

> गला सूखने व प्यास कम करने के लिए 2-2 केले प्रतिदिन 3 बार खाने से किसी भी कारण से अधिक प्यास का लगना बंद हो जाता है।

11. मुनक्का :

> थोड़ी-थोड़ी देर पर प्यास लगने व पानी पीने के बाद भी प्यास लगे तो इस प्रकार के प्यास में बिना बीज के 4 मुनक्का मिश्री के साथ दिन में 2 से 3 बार लेने से लाभ होता है।

> 10-20 दाने मुनक्का शाम को पानी में भिगोकर सुबह मसलकर छान लें और उसमें थोड़ा सफेद जीरे का चूर्ण और मिश्री या चीनी मिलाकर पिलाने से पित्तजन्य दाह शांत होती है।

> मुनक्का और मिश्री 10-10 ग्राम रोज पीसकर सेवन करने से प्यास के अधिक लगने में लाभ होता है।