एसिडिटी क्या है : acidity kya hai

दुष्ट, अम्ल विदाही तथा तीक्ष्ण पदार्थों के सेवन से, चर्बी वाली खाद्य वस्तुएँ अधिक खाने से, अधपका माँस खाने से, दाँत खराब होने के कारण तथा भोजन का ठीक प्रकार पाचन न होने आदि कारणों से यह रोग हो जाता है। संक्षेप में यह रोग बदहजमी का साधारण सा लक्षण है। खाई हुए खुराक में खटास उत्पन्न होकर यह रोग होता है।

एसिडिटी के लक्षण : acidity ke lakshan kya hai

 1)   कौड़ी प्रदेश में पीड़ा, जलन और शोथ होती है। भोजन के 1-2 घन्टे बाद यह लक्षण दिखलायी देता है। 2) खाना (मीठा) सोड़ा लेने से वेदना थोड़ी देर के लिए शान्त हो जाती है।
3)   खट्टी डकारें तो कभी-कभी तो इतनी आती है कि मुख में खट्टा पानी सा आने लग जाता है जिससे स्वाद बिगड़ जाता है।
4)   अधपचा भोजन मल में निकलता है। कभी-कभी रोगी को अतिसार (दस्त) भी हो जाते हैं।
5)   रोग बढ़ने पर अरुचि, शिरःशूल, उबकाई, उदरशूल (आमाशयिक पीड़ा) तथा चमड़ी पर चकत्ते निकलना आदि लक्षण भी हो जाते है।

एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए : acidity me kya nahi khaye

1)   भोजन की ओर विशेष ध्यान दें। शराब, माँस, मिर्च, मसाले, चाय, काफी, तम्बाकू छुड़वा दें।
2)   आँवला या अनार को छोड़कर कोई अन्य खट्टा फल खाने को न दें।
3)   मैदायुक्त भोजन, आलू, गरिष्ठ भोजन, बासी भोजन तथा अधिक मात्रा में शंक्कर या इससे बनी मिठाइयाँ न दें।
4)   तिल, तेल, लवण, दही, मद्यपान, गुरुपाकी, अन्न, अम्लयुक्त पदार्थ, पित्त-प्रकोपी आहार आदि के सेवन से बचे।
5)   अचार, स्पाइसी चटनी, सिरका भी ज्यादा न ही खाएं तो अच्छा है। खट्टी चीजों से एसिड जल्दी बनता है।

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए : acidity me kya khaye

 1)   नये रोग में मुंग, दूध आदि केवल प्रोटीन वाली वस्तुएं दें। कुछ दिन बाद आराम होने पर मक्खन, मलाई आदि की चिकनी वस्तुएँ देना आरम्भ करें।
2)   सुबह फल, दोपहर में हल्का भोजन, रात में दूध या हलका भोजन दें।
खाने के बाद खाना सोड़ा (सोडा बाई कार्ब) या जैतून का तेल (ओलिव आयल) या चूने का पानी नित्य 10 ग्राम तक थोड़ा-थोड़ा करके पिलायें। इससे अम्ल रस कम बनेगा खाना (मीठा) सोड़ा शहद में मिलाकर 4-4 घन्टे बाद चटाने से भी लाभ मिलता है।
3)   मूंग, पुराना चावल, करेला, पटोल-घृत, गेहूँ, करेज, तिक्त एवं लघु शाक, पिप्पली, हरड़ अविदाही आहार, लहसुन, मधु आदि ।

अम्लपित्त / एसिडिटी के घरेलू उपाय : acidity ke gharelu upay

1)   करेले के फूल या पत्तों को घी में भूनकर उनका चूर्ण बनालें । 1-2 ग्राम चूर्ण दिन में 2/3 बार खाने से अम्ल पित्त में लाभ होता है।

2)   जीरा (श्वेत) तथा धनिया को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर खिलायें, अम्लपित्त में लाभप्रद है।  ( और पढ़ें – एसिडिटी के सफल 59 घरेलु उपचार )

3)   सन्तरे के रस में थोड़ा जीरा (भुना हुआ) और थोड़ी मात्रा में सैंधा नमक मिलाकर पिलाने से अम्लपित्त में लाभ होता है।”Acidity Problem Solution - एसिडिटी की छुट्टी कर देंगे यह 27 आसान उपाय | Acidity ka ilaj

4)  बच के चूर्ण को 2-4 रत्ती की मात्रा में शहद या गुड़ के साथ सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ होता है। ( और पढ़ें – एसिडिटी के आयुर्वेदिक नुस्खे  )

5)  नित्य 1 तोला चूने का निथरा हुआ पानी पीने से अम्लपित्त में आशातीत लाभ होता है।

6)  पिप्पली चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में मिश्री के साथ नित्य सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ होता है। एक माह प्रयोग करें।

7)  मुलहठी के चूर्ण को मधु तथा धृत की असमान मात्रा में मिलाकर चटाने से अम्लपित्त में लाभ होता है। यदि शहद 5 ग्राम लें तो घृत 10 ग्राम। ( और पढ़ें – शहद खाने के 18 जबरदस्त फायदे )

8)  मुनक्का 50 ग्राम तथा सौंफ 25 ग्राम दोनों को जौ कूट कर 200 ग्राम पानी में रात को भिगों दें। प्रात:काल मसल, छान कर उसमें दस ग्राम मिश्री मिलाकर पिलायें । अम्लपित्त में लाभ होता है।

9)  शंख भस्म 1 ग्राम तथा सोंठ का चूर्ण आधा ग्राम दोनों को मिलाकर शहद के साथ चटावे। अम्ल पित्त दूर भाग जाता है।  ( और पढ़ेंपेट दर्द के 41 देसी घरेलु उपचार )

10)    लौंग पेट से गैस निकाल देता है। साथ ही, यह पेट में फूड के मूवमेंट को भी सही रखता है। लौंग का स्वाद तीखा होता है। यह स्लाइवा को बढ़ाता है, जो पाचन के लिए जरूरी है। अगर एसिडिटी की दिकक्त है, तो एक लौंग चबाकर खाएं। इससे काफी राहत मिलेगी। धीरे-धीरे लौंग को चबाने से एसिड कम होता है और आराम मिलता है।

11 )   पुदीने की पत्तियों को माउथ फ्रेशनर की तरह भी उपयोग किया जाता है और गार्निश के लिए भी। एसिडिटी को खत्म करने के लिए पुदीना सबसे बेस्ट घरेलू उपाय है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम को सही रखता है। पेट में एसिड की वजह से होनेवाली जलन और दर्द को कम करने में भी यह काफी कारगर है। अगर खाने के बाद एसिडिटी की दिकक्त महसूस होती है, तो कुछ पत्तियां पुदीने की भी खा सकते हैं या पानी में उबालकर पानी पी सकते हैं। इससे जल्द राहत मिलेगी।  ( और पढ़ें – पुदीना के जबरदस्त फायदे )

12)   अदरक डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक रखता है और इसमें पोषक तत्त्व भी होते हैं। अदरक शरीर के प्रोटीन को अलग करने का भी कामकरता है। अदरक के सेवन से पेट में अल्सर गांठ नहीं होती। एसिडिटी की दिक्कत होने पर अदरक का एक टुकड़ा चबाएं। तुरंत आराम के लिए अदरक को पानी के साथ उबालकर पिएं।  ( और पढ़ें – अदरक के 111 औषधीय प्रयोग )

13)   आंवले को कफ और पित दूर भगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें विटामिन सी की मात्रा ज्यादा होने के चलते यह पेट से जुड़ी समस्याओं में बहुत लाभकारी है। दो दिन में एक बार एक चम्मच आंवले का चूर्ण खाने से एसिडिटी, कब्ज और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।

14)   ज्यादा एसिडिटी होने पर सुबह नारियल पानी पीने से काफी आराम मिलता है। ( और पढ़ें – नारियल पानी के 38 लाजवाब फायदे )

15)   डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए तुलसी बेहद फायदेमंद होती है। यह पेट में लिक्विड बढ़ाने का काम करती है और इसमें अल्सर विरोधी गुण भी होते हैं। स्पाइसी खाना होनेवाले एसिड को कम करने का भी कामकरता है। रोज सुबह तुलसी खाने से गैस की समस्या कम होती है। खाना के बाद पांच से छह तुलसी की पत्तियां रोज खाने से एसिडिटी में आराम मिलता है।  ( और पढ़ें –  तुलसी के लाजवाब फायदे )

16)   दूध में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो एसिड को खत्म करने का काम करता है। दूध एसिड को अब्जॉर्ब भीकरता है। एसिडिटी में होनेवाली जलन को कम करने के लिए ठंडा दूध अच्छा रहता है। ठंडा दूध पेट में चीनी की तरह घुल जाता है, जिससे जलन कम हो जाती है। रोज सुबह एक कप ठंडा दूध पीने से एसिडिटी की दिक्कत खत्म हो जाती है।

17)   सौंफ ठंडा होता है, जो पेट में जलन को कमकरता है। होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद सौंफ सर्व किया जाता है, ताकि खाना खाने के बाद जलन या एसिडिटी की दिक्कत न हो। एसिडिटी की परेशानी ज्यादा होने पर सौंफ को पानी में उबालकर पीने से भी फायदा होता है। एसिडिटी की दिक्कत न हो, इसके लिए रोज खाना खाने के बाद सौंफ खाएं। इसमें कफ, पित्त और वात (गैस) को बैंलेस करनेवाले औषधीय गुण हैं। पेट में ऐंठन या डाइजेस्टिव सिस्टम में दिकक्त होने पर यह काफी लाभकारी है। यह पेट में बननेवाले एक्सट्रा एसिड के प्रभाव को कम करता है।

18)   इलायची के मीठे स्वाद और ठंडा होने की वजह से एसिडिटी और जलन में राहत मिलती है। एसिडिटी होने पर इलायची पाउडर को पानी में उबालकर पीना सही रहता है।

19)   पिप्पली चूर्ण को शहद के साथ चाटें। ठंडे दूध का सेवन करें। सौंफ, आँवला व गुलाब के फूलों का सम मात्रा में चूर्ण बनाकर आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम लें। नियमित रूप से सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है। नारियल पानी पीने से भी एसिडिटी में आराम होता है। लौंग चूसने से भी एसिडिटी खत्म हो जाती है।

20)   एक गिलास गर्म पानी में एक चुटकी कालीमिर्च चूर्ण तथा आधा नीबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह सेवन करें। ( और पढ़ें – कालीमिर्च के 51 हैरान कर देने लाभ )

एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार : acidity ka ayurvedic ilaj

रस-   काम दुधारस (मुक्तायुक्त) लीलाविलास रस, सूतशेखर रस, अम्लपित्तान्तक रस, सर्वतोभ्रद रस, प्रवाल पंचामृत 125 से 250 मि.ग्रा. वयस्कों को दिन में दो बार। आमलकी घृत अथवा मधु ।

लौह-   धात्री लौह, अम्लपित्तान्तक लौह, अभ्रलौह, चतुः सम मान्डूर, सिता-मान्डूर 250 मि.ग्रा. से 500 मि.ग्रा. दिन में 2-3 बार भोजनोपरान्त, मधु+ धृत अथवा सिता+त्रिफलातिक्ता क्वाथ या ताजे जल आदि अनुपान के साथ।

भस्म-  प्रवाल भस्म 15 से 25 मि.ग्रा. ताम्रभस्म 60 मि.ग्रा., शंख भस्म 125 मि.ग्रा. कपर्द भस्म 250 मि.ग्रा. से 1 ग्राम तक मधु अथवा जल या मधु के साथ प्रयोग करायें।

पिष्टी-   मुक्ता पिष्टी, 125 मि.ग्रा. दिन में 2 बार, मुक्ता-शुक्ति पिष्टी 250 से 500 मि.ग्रा. दिन में 2-3 बार मधु से सेवनीय। | वटी-द्राक्षादि वटी, 1 गोली रात्रि में सोते समय, उष्ण जल से। संशमनी वटी 2 गोली शीतल जल से । पानीय भक्त वटी 1 गोली दिन में 2 बार काँजी से।

आसव-  कुमार्यासव, पुनर्नवारिष्ट, सारिवाद्यासव 15-से 25 मि.ली. समान भाग जल मिलाकर भोजनोपरान्त सेवनीय।

चूर्ण-  अविपत्तिकर चूर्ण, 3 से 5 ग्राम। पंचनिम्बादि चूर्ण 3 ग्राम। एलादि चूर्ण, दशक्षार चूर्ण (मात्रा उपर्युक्त) त्रिकट्वादि चूर्ण 1 ग्राम शीतल जल नारियल के जल अथवा मधु या ताजे जल से प्रातः सायं अथवा भोजन के बाद दें।।

धृत-  शतावरी धृत, जीरकाद्य धृत, द्राक्षादि घृत में से कोई एक से तीन ग्राम तक सेवन करवायें। नारिकेल खन्ड पाक, आम्रपाक, कुष्माण्डावलेह, जीरकावलेह, द्राक्षावलेह, 10 ग्राम प्रात:काल गोदुग्ध या नारिकेल जल से तथा हरीतकी खण्ड, पिप्पली खण्ड, शुण्ठी खण्ड 5 से 10 ग्राम सायंकाल दुग्ध से दिलवायें। सर्जिक्षार, नारिकेल लवण, ऊर्ध्वग 500 मि.ग्रा. से 2 ग्राम तक तथा चूर्णोदक 10 ग्राम तक शीतल जल से दिन में 2-3 बार तक दें। पोटलादि क्वाथ 10 मि.ली. सिता मिलाकर प्रयोग कराया जा सकता है।

नोट :- किसी भी औषधि या जानकारी को व्यावहारिक रूप में आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले यह नितांत जरूरी है ।

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3)  आँवला चूर्ण(Achyutaya Hariom Amla Churna

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